भोपाल पुलिस ने स्मार्ट सिटी रोड पर हुई 55 लाख की हवाला लूट मामले में 12 आरोपियों को पकड़ा है। सट्टे के शौकीन अकाउंटेंट ने रची थी पूरी साजिश। पढ़ें पूरी खबर।
सतना स्मार्ट सिटी इन्क्यूबेशन सेंटर की निर्मात्री पहल से महिलाएं उद्यमिता की ओर बढ़ रही हैं। नि:शुल्क प्रशिक्षण, मेंटरशिप और व्यवसायिक मार्गदर्शन से कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर सफल व्यवसाय शुरू कर रही हैं।
सतना के मुख्य बाजार में सीवर लाइन की अधूरी खुदाई से बारिश में कीचड़ फैल गया। 8 साल बाद भी काम अधूरा, व्यापारियों का 60–70% कारोबार प्रभावित।
सतना में दिशा बैठक के दौरान सांसद गणेश सिंह ने स्मार्ट सिटी और सीवर लाइन कार्यों की अव्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया। लेटलतीफी, गुणवत्ता और जिम्मेदारी को लेकर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।
भोपाल मेट्रो रेल सेवा का 20 दिसंबर को ऐतिहासिक शुभारंभ होने जा रहा है। जानें मेट्रो की रूट, स्टेशन, लागत और अत्याधुनिक सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी।
सतना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के आरोप लोकसभा तक पहुंचे। सांसद गणेश सिंह ने 943 करोड़ के कार्यों में अनियमितताओं का आरोप लगाकर थर्ड पार्टी ऑडिट की मांग की।
सतना में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। रात में बनी डामर सड़क का सुबह उखड़ जाना नगर निगम और संविदाकारों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप खड़े करता है। आठ करोड़ की स्टेशन रोड परियोजना से लेकर 10 करोड़ की डामरीकरण योजना तक सब पर भ्रष्टाचार और अनियमितता की गूंज।
सीधी जिले को मिनी स्मार्ट सिटी का दर्जा मिले कई साल बीत चुके हैं, लेकिन सुविधाएं आज भी अधूरी हैं। शहर में प्रस्तावित एक दर्जन यात्री प्रतीक्षालयों का निर्माण अब तक नहीं हो पाया है। नगर पालिका की लापरवाही के कारण न यात्रियों को छांव मिल पा रही है, न बैठने की जगह। शहीद श्यामलाल सिंह तिराहा, सम्राट चौक, ऊंची हवेली और सिंचाई विभाग कार्यालय के पास जैसे प्रमुख स्थानों पर यात्री सड़क पर खड़े होकर बसों और टैक्सियों का इंतजार करने को मजबूर हैं। वहीं सूखा नाला सौंदर्यीकरण सहित कई अन्य स्मार्ट सिटी प्रोजेक
सतना स्मार्ट सिटी योजना के तहत कोठी तिराहे पर करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई सब्जी मंडी अब शराबियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुकी है। चबूतरों पर सब्जियों की जगह शराब और गांजे का सेवन होता है, जबकि दुकानदार सड़कों पर दुकानें लगाने को मजबूर हैं।
सतना जिले में सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अंतर्गत अनुदान संग्रहण का लक्ष्य 13.55 लाख था, लेकिन 4 अगस्त तक केवल 3.77 लाख ही इकट्ठा हो सके। जिला प्रशासन, सीमेंट फैक्ट्रियां और स्मार्ट सिटी जैसी बड़ी संस्थाएं भी मदद से दूर रहीं। पुलिस, एसडीएम, सीईओ, सीएमओ तक ने सहयोग नहीं किया।






















